शादी के सपने, हकीकत का अंधियारा
मार्च 2025 में शादी के समय ₹75 लाख, महिंद्रा स्कॉर्पियो और गहनों के बावजूद यह रिश्ता शुरू से ही लालच और अपमान की नींव पर खड़ा था। पति, मेरठ का एक जिम टीचर, अपनी पत्नी को नोरा फतेही जैसी काया अपनाने के लिए मजबूर करता।
जुनून जो डरावना बन गया
“तीन घंटे जिम जाओ।”
“वर्कआउट मिस किया तो खाना छोड़ दो।”
“काश, मैं किसी नोरा जैसी लड़की से शादी करता…”
दहेज की आग
मायके का भारी खर्च भी उसके लिए ढाल नहीं बन पाया। ससुराल वालों की आँखों में हमेशा और अधिक पाने की भूख दिखती रही।
सबसे बड़ा वार: जबरन गर्भपात
गर्भवती होने की खुशखबरी पर पति ने उसे गोली खाने को दी। बाद में पता चला कि वह अबॉर्शन पिल थी। अस्पताल पहुंचने तक गर्भपात हो चुका था।
बेघर और अपमानित
जुलाई के अंत में उसे ससुराल से निकाल दिया गया। बीमारी और सदमे के बीच घर के दरवाज़े बंद कर दिए गए।
इंसाफ़ की दस्तक
पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल ने बताया कि पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक अपमान और जबरन गर्भपात जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
⚖️ क्यों मायने रखती है यह कहानी?
- यह मामला दिखाता है कि औरत को आज भी शरीर और शक्ल तक सीमित कर दिया जाता है।
- दहेज अब भी रिश्तों को नष्ट करने वाली जंजीर है।
- प्यार और सम्मान की जगह लालच और जुनून का बोझ महिला पर डाला जाता है।