क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने पूर्व आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि अब दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को आश्रयस्थलों में बंद रखना और उन्हें स्थायी रूप से रिहाई से रोकना सही नहीं होगा।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि कुत्तों को कृमिनाशक दवा और टीकाकरण के बाद उनके मूल स्थान पर वापस छोड़ा जाएगा। हालांकि, उन कुत्तों को जो आक्रामक हैं या रेबीज से संक्रमित हैं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाएगा।
देशव्यापी नीति की तैयारी
कोर्ट ने पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाने का अनुरोध किया है ताकि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आवारा कुत्तों के लिए बेहतर नियम लागू हो सकें। कोर्ट ने विशेष रूप से केवल निर्दिष्ट फीडिंग प्वाइंट पर ही आवारा कुत्तों को खाना खिलाने का आदेश दिया है जिससे उनकी देखभाल नियंत्रित हो सके।
मेनका गांधी का स्वागत
पशु अधिकार कार्यकर्ता और भाजपा नेता मेनका गांधी ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह वैज्ञानिक निर्णय कुत्तों के साथ दयालुता का प्रतिनिधित्व करता है और इस कार्यक्रम के लिए सरकार द्वारा 2,500 करोड़ रुपये आवंटित करना एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कुत्तों के काटने के मुख्य कारण स्थानांतरण और भय हैं, इसलिए नसबंदी और नियंत्रण आवश्यक है।
कुत्ता प्रेमियों की खुशी
इस फैसले के तुरंत बाद दिल्ली-एनसीआर में कुत्ता प्रेमियों ने जंतर-मंतर पर जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने अपने बीच खुशी जताई और कहा कि इस निर्णय से दयालुता और विज्ञान का संतुलन बना रहेगा जो आवारा कुत्तों की भलाई के लिए अहम है।
निष्कर्ष
यह फैसला आवारा कुत्तों की सुरक्षित देखभाल और संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। नई नीति से न केवल आवारा कुत्तों का बेहतर इलाज और नियंत्रण संभव होगा, बल्कि शहरों में उनकी देखभाल के लिए नियंत्रित फीडिंग प्वाइंट भी स्थापित किए जाएंगे। इससे कुत्तों की भलाई सुनिश्चित होगी और शमन होगा।