हैदराबाद सेरोगेसी स्कैम: डीएनए टेस्ट से खुला बड़ा राज़, कपल को मिला अपना बच्चा नहीं है जेनेटिक रूप से उनका

हैदराबाद: सरोगेसी के ज़रिये माता-पिता बनने का सपना देख रहे एक कपल के लिए वह दिन एक बुरे सपने में बदल गया, जब डीएनए रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नवजात शिशु से उनका कोई जैविक संबंध नहीं है।

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इस व्यक्तिगत त्रासदी ने एक बड़े अवैध सरोगेसी और शुक्राणु तस्करी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है, जिसमें अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें एक डॉक्टर भी शामिल हैं।

इस गोरखधंधे की धुरी मानी जा रही हैं डॉ. नम्रता, जो सिकंदराबाद स्थित यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर की मैनेजर हैं। हैदराबाद पुलिस के मुताबिक, वह ग़रीब महिलाओं को लालच देकर सरोगेसी के लिए मजबूर करती थीं और राज्यों के बीच अवैध रूप से शुक्राणु व अंडाणु भेजने का गोरखधंधा चला रही थीं।

जब सपना टूटा: डीएनए रिपोर्ट ने उड़ा दिए होश

राजस्थान के एक दंपति, जो फिलहाल सिकंदराबाद में रह रहे हैं, ने यह मामला उजागर किया। उन्होंने पिछले साल ₹35 लाख में सरोगेसी प्रक्रिया करवाई थी, लेकिन जब बच्चा पैदा हुआ, तो सरोगेट मां की डीएनए जांच के लिए की गई कई अपीलों को डॉक्टर टालती रहीं।

संदेह गहराने पर दंपति ने दिल्ली में निजी डीएनए जांच करवाई — और सच्चाई सामने आई: बच्चा उनका जैविक संतान नहीं था।

जून में जब डॉ. नम्रता को इन तथ्यों से अवगत कराया गया, तो उन्होंने “मिस्टेक” का हवाला देते हुए समय मांगा — और फिर गायब हो गईं।

थक-हारकर कपल ने गोपालपुरम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

आधी रात में छापा, सबूत जब्त

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर पर रातभर छापेमारी की। कर्मचारियों से पूछताछ की गई और महत्वपूर्ण दस्तावेजों व शुक्राणु के नमूनों को जब्त किया गया।डीसीपी रश्मि पेरुमल के अनुसार, जांच में पता चला कि क्लिनिक गुजरात, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में अवैध रूप से शुक्राणु और अंडाणु भेजता था।

यह केंद्र इंडियन स्पर्म टेक नामक एक अनधिकृत संस्था के साथ मिलकर काम कर रहा था।

गिरफ्तारियां और बढ़ता दायरा

अब तक डॉ. नम्रता, पंकज सोनी (इंडियन स्पर्म टेक के रीजनल मैनेजर) सहित संपत, श्रीनू, जितेंद्र, शिवा, मणिकंठ और बोरों नामक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सभी पर अवैध प्रजनन सामग्री एकत्र करने और तस्करी का आरोप है।जांच में यह भी सामने आया है कि गरीब महिलाओं को बिना पूरी जानकारी और वैध प्रक्रिया के सरोगेसी के लिए इस्तेमाल किया गया।

एक महिला को तो हैदराबाद से विशाखापत्तनम तक फ्लाइट से डिलीवरी के लिए ले जाया गया, और दंपति को यह बताकर गुमराह किया गया कि बच्चा उनका है।

कानून और नैतिकता की खुली धज्जियां

पुलिस अब Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, Surrogacy Regulation Act और मेडिकल नैतिकता से जुड़े अन्य नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है।

डीसीपी रश्मि पेरुमल ने बताया, “संभावना है कि इस नेटवर्क में कई और क्लीनिक और एजेंट शामिल हैं।”

यह मामला अब सिर्फ एक कपल की व्यथा नहीं, बल्कि प्रजनन तकनीकों के नाम पर चल रहे एक बड़े अपराध का पर्दाफाश बन चुका है।

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